मुझे अपने 13 सप्ताह के बच्चे के साथ क्या करना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Mon 6th Mar 2023 : 10:07

मुझे 13 सप्ताह के शिशु के विकास के लिए क्या करना चाहिए
कई बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में ज्यादा समझदार होते हैं, ये भी देखा गया है कि ऐसे बच्चे जल्दी बोलने लगते हैं। ऐसे में आप कोशिश करें कि शिशु से ज्यादा से ज्यादा बात करते रहें। आप जब भी उसे कहीं बाहर घुमाने ले जाएं तो उसे चीजों का नाम बताते हुए बात करें, जैसे कि य ग्रीन कलर है या ये पार्क है आदि। भले ही आपका शिशु आपकी बातों का जवाब न दें, लेकिन उसका दिमाग कुछ हद तक आपकी बातें समझ रहा होता है, जो कि बच्चे की समझ को बढ़ाता है

रैशेज की वजह


गीले डायपर की वजह से शिशु की त्वचा में रैशेज की समस्या हो सकती है। इससे कई तरह के कीटाणु पैदा हो सकते हैं, जो कि त्वचा में कई संक्रमणों का कारण भी बन सकते हैं। शिशु को डायपर के कारण होने वाले रैशेज से बचाने के लिए जरूरी है कि जितना हो सके आप उसे डायपर से दूर रखें। अगर शिशु को डायपर पहना भी रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि डायपर गीला होते ही उसे तरंत बदल दें, गीला ज्यादादेर न पहने रहने दें। शिशु को रैशेज तथा त्वचा संक्रमणों से बचाने के लिए आप जिंकऑक्साइड युक्त क्रीम का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। यह क्रीम त्वचा संक्रमण फैलाने वाले कीटाणुओं का खत्म कर त्वचा पर एक तरह का सुरक्षा कवच बना देती है। कई शोध यह भी बतातें हैं कि ज्यादा स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायपर रेशेज की संभावना कम होती है।


ध्यान रखें कि अगर आपके शिशु के शरीर पर फंगल इंफेक्शन के कारण ज्यादा रैशेज दिखाई दे रहें हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से प्रभावी उपचार के लिए सलाह लेनी चाहिए

सडन डेथ सिंड्रोम इन इन्फैन्ट्स (SIDS)


वैसे इस बारे में आपको ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह बीमारी काफी दुर्लभ है, जैसे ही आपका शिशु एक साल का हो जाता है, उसे इस बीमारी से कोई खतरा नहीं रहता है।


13 सप्ताह के शिशु को स्तनपान


13 सप्ताह के शिशु या 13 सप्ताह के शिशु की देखभाल के दौरान स्तनपान कराना थोड़ा आसान और आरामदायक हो जाता है। बच्चा अब बेहतर रूप से स्तनपान करने लगेगा और आपके लिए भी यह समझना आसान हो जाएगा की आपका शिशु कब दूध पीना चाहता है और कब नहीं। आप यह भी समझ सकेंगी की वह भूख के कारण रो रहा है या अन्य कोई कारण है।।
शिशु के लिए टाइम टेबल निर्धारित करें


बचपन की आदत हमेशा बच्चे व लोगों में बनी रहती है। यह एक समय होता है जब शिशु पर समय की कोई पाबंदी नहीं होती है। वह कभी भी सोते हैं, कभी जागते हैं या फिर खाते हैं। लेकिन, अब वो समय आ गया है जब आपको शिशु को समय का महत्त्व सिखाना चाहिए, क्योंकि इस समय तक शिशु आपकी बातों को समझने लायक हो जाता है। इसलिए उसके खाने और सोने का टाइम टेबल बना देना चाहिए।


लेकिन, आप एक बात का और भी ध्यान रखें कि शिशु के लिए टाइम टेबल निर्धारित करने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप उसकी जरूरतें पूरी नहीं करेंगी। बस उन जरूरतों को पूरा करने का सही समय निधार्रित करें। यह आपके शिशु को छोटी उम्र से ही समय का महत्त्व सीखाने में मदद करेगा, साथ ही आपके और शिशु के बीच के रिश्ते भी मजबूत होंगे।

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